लखनऊ : उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। योगी सरकार ने पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण तय करने से जुड़ी तकनीकी और कानूनी बाधाओं को दूर करने के लिए “समर्पित राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग” का गठन कर दिया है। प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार द्वारा इसकी आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
रिटायर्ड जस्टिस राम औतार सिंह बने आयोग के अध्यक्ष
इस नए आयोग की कमान इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस राम औतार सिंह को सौंपी गई है। आयोग का मुख्यालय लखनऊ में स्थापित किया गया है। आयोग में कुल पांच सदस्य होंगे, जिसमें अध्यक्ष के अलावा चार अन्य वरिष्ठ रिटायर्ड अधिकारी शामिल किए गए हैं, जो जल्द ही अपना कार्य शुरू करेंगे।
क्यों जरूरी पड़ा नया OBC आयोग?
सरकार ने कैबिनेट में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसके पीछे कई कानूनी और तकनीकी कारण बताए जा रहे हैं—
1. पुराने आयोग का कार्यकाल और अधिकारों की सीमा
प्रदेश में पहले से मौजूद OBC आयोग का मूल कार्यकाल अक्टूबर 2025 में समाप्त हो चुका था, जिसे बढ़ाकर अक्टूबर 2026 किया गया था। लेकिन कानूनी रूप से उसके पास “समर्पित सर्वे आयोग” जैसे अधिकार स्पष्ट नहीं थे।
2. सर्वे की वैधता का मुद्दा
नियमों के अनुसार OBC आरक्षण से जुड़ा सर्वे केवल आयोग अपने मूल कार्यकाल के भीतर ही कर सकता है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद सर्वे की वैधता पर सवाल उठते हैं, जिससे आरक्षण प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी।
3. कोर्ट आदेशों का पालन
हाई कोर्ट के निर्देशों और कानूनी पेच को दूर करने के लिए सरकार ने नया समर्पित आयोग बनाकर प्रक्रिया को वैधानिक रूप से मजबूत करने का कदम उठाया है।
अब क्या करेगा नया आयोग?
नया आयोग पूरे उत्तर प्रदेश में रैपिड सर्वे कराएगा और जातिगत/सामाजिक-आर्थिक डेटा जुटाएगा। इसी आधार पर तय होगा कि OBC आरक्षण 27% को किस तरह लागू किया जाएगा। कौन सी सीटें आरक्षित होंगी और कौन सी सामान्य रहेंगी। पंचायत स्तर पर आरक्षण का वास्तविक बंटवारा कैसे होगा? आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिसके बाद आरक्षण की अंतिम अधिसूचना जारी होगी।
पंचायत चुनाव कब हो सकते हैं?
प्रशासनिक प्रक्रिया को देखते हुए सर्वे और डेटा संग्रह में समय लगेगा रिपोर्ट तैयार करने और सत्यापन में भी अवधि लगेगी इसके बाद आरक्षण सूची फाइनल होगी। इन सभी प्रक्रियाओं में लगभग 5 से 7 महीने का समय लग सकता है।
संभावित समय-सीमा
इसी आधार पर माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव अक्टूबर–नवंबर 2026 के आसपास कराए जा सकते हैं, हालांकि अंतिम निर्णय राज्य निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के बाद ही होगा।
