नई दिल्ली : देश की राजनीति में एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच तीखा वार-पलटवार देखने को मिला है। सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार अपनी नाकामियों का बोझ जनता पर डाल रही है। राहुल गांधी का यह बयान प्रधानमंत्री मोदी की उस अपील के बाद आया है, जिसमें उन्होंने लोगों से खाने के तेल, पेट्रोल और रासायनिक खाद की खपत कम करने तथा सार्वजनिक परिवहन और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात कही थी।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को घेरा। उन्होंने लिखा कि मोदी सरकार जनता से त्याग मांग रही है। राहुल गांधी ने कहा, “मोदी जी ने जनता से कहा- सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो और घर से काम करो। ये उपदेश नहीं बल्कि सरकार की नाकामी के सबूत हैं।”
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि 12 साल के शासन के बाद देश को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया गया है, जहां सरकार लोगों को बता रही है कि क्या खरीदना है और क्या नहीं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि खुद जवाबदेही से बच सकें। उन्होंने कहा कि देश चलाना अब “समझौता करने वाले प्रधानमंत्री” के बस की बात नहीं रह गई है।
दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सिकंदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देशवासियों से आयात पर निर्भरता कम करने की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि अगर हर परिवार खाने के तेल का उपयोग थोड़ा कम कर दे तो इससे न केवल लोगों की सेहत बेहतर होगी बल्कि देश की विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। उन्होंने इसे देशभक्ति से जोड़ते हुए कहा कि आज के समय में जिम्मेदारी से जीवन जीना भी देशभक्ति का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों से रासायनिक खाद का उपयोग कम करने और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि भारत बड़ी मात्रा में रासायनिक खाद विदेशों से आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है। अगर किसान प्राकृतिक खेती अपनाते हैं तो इससे जमीन की उर्वरता भी बनी रहेगी और देश को आर्थिक लाभ भी होगा।
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जहां मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध हैं, वहां उनका इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही कार पूलिंग, रेलवे से माल ढुलाई और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की भी अपील की। अब राहुल गांधी के बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन गया है। एक तरफ सरकार इसे आत्मनिर्भरता और आर्थिक बचत की दिशा में कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे सरकार की नीतिगत विफलता और जनता पर बोझ डालने की कोशिश करार दे रहा है।
