नई दिल्ली : संसद के बजट सत्र के दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा जारी है। इसी बीच लोकसभा में ‘ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों की सुरक्षा) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किया गया है। सरकार का कहना है कि यह विधेयक ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों को मजबूत करने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं दूसरी ओर निलंबित विपक्षी सांसदों का मुद्दा भी संसद में गरमाया हुआ है। इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को लेकर भी सियासी हलचल तेज हो गई है।
लोकसभा में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया गया है। ‘ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों की सुरक्षा) संशोधन विधेयक, 2026’ का उद्देश्य इस समुदाय के अधिकारों को और मजबूत बनाना तथा उनके जीवन स्तर को बेहतर करना बताया गया है। सरकार का कहना है कि इस विधेयक के जरिए ट्रांसजेंडर समुदाय को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में अधिक अवसर और सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि समाज में लंबे समय से उपेक्षित रहे इस वर्ग को समान अधिकार और सम्मान दिलाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से इस संशोधन विधेयक को लाया गया है ताकि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को भेदभाव से बचाया जा सके और उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का अवसर मिल सके। इस बीच संसद में आर्थिक मुद्दों को लेकर भी चर्चा जारी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि सरकार वित्तीय अनुशासन को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि संसद में जो आश्वासन दिया गया था, वह दूसरी अतिरिक्त अनुदान मांगों 2025-26 पर बहस के दौरान भी लागू रहेगा।
वित्त मंत्री ने भरोसा दिलाया कि चालू वित्तीय वर्ष के दौरान होने वाला खर्च आगामी बजट 2026-27 में निर्धारित राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के भीतर ही रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार आर्थिक संतुलन बनाए रखने और वित्तीय जिम्मेदारी का पालन करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वहीं दूसरी ओर संसद के बजट सत्र में निलंबित किए गए विपक्षी सांसदों का मुद्दा भी लगातार गरमाया हुआ है। विपक्षी दलों ने सरकार और लोकसभा अध्यक्ष से सात कांग्रेस सांसदों और एक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद का निलंबन वापस लेने की मांग की है।
सूत्रों के अनुसार इस मुद्दे को लेकर कई विपक्षी नेताओं ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात की। मुलाकात करने वाले नेताओं में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले, द्रमुक की कनिमोझी और तृणमूल कांग्रेस की शताब्दी रॉय शामिल थीं।
इन नेताओं ने संसदीय कार्य मंत्री से निलंबन वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि इससे संसद के कामकाज पर असर पड़ रहा है और विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश हो रही है। सूत्रों के मुताबिक किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेताओं को आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को लोकसभा अध्यक्ष के सामने उठाएंगे और इस पर उचित चर्चा की जाएगी।
बताया जा रहा है कि शुक्रवार को हुई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में भी कांग्रेस के मुख्य सचेतक के सुरेश ने इस मुद्दे को दोबारा उठाया। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि इस विषय पर चर्चा कर जल्द ही जवाब दिया जाएगा। फिलहाल निलंबित सांसदों का मुद्दा सरकार और विपक्ष के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। इसी बीच संसद में एक और बड़ा सियासी मुद्दा सामने आया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव भेजा गया है। सूत्रों के अनुसार विपक्ष की ओर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का नोटिस लोकसभा और राज्यसभा दोनों में जमा किया गया है।
अब संसद के नियमों के अनुसार इस प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। यदि प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाता है तो सदन में इस पर चर्चा हो सकती है और उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। कुल मिलाकर संसद का मौजूदा सत्र कई अहम मुद्दों को लेकर चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। एक तरफ सरकार सामाजिक न्याय और आर्थिक संतुलन से जुड़े कदमों पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संसद में अपनी भागीदारी को लेकर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में इन सभी मुद्दों पर संसद में और भी तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
