लखनऊ : यूपी की राजनीति में सपा को आज एक बड़ी संगठनात्मक मजबूती मिली है। भाजपा और कांग्रेस के कई प्रमुख नेताओं ने पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थामा और अखिलेश यादव के नेतृत्व और पार्टी की नीतियों पर पूर्ण आस्था जताई। इस अवसर पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने सभी नेताओं का स्वागत करते हुए कहा कि इन सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं के आने से समाजवादी पार्टी को 2027 के विधानसभा चुनावों में मजबूती मिलेगी।
भाजपा से आए विपिन कुमार रावत और उनके साथी शामिल
विपिन कुमार रावत, जो पूर्व में भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता रहे हैं, ने पार्टी छोड़ते हुए कहा कि वे समाजवादी पार्टी की जनहितकारी नीतियों, बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों के प्रति प्रतिबद्धता, और सामाजिक न्याय के लिए कार्यों से प्रभावित होकर शामिल हुए हैं। उनके साथ भाजपा के बूथ अध्यक्ष राम सिंह रावत, सुशील कुमार, मनोज वर्मा, नर्मदा वर्मा भी समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए।
कांग्रेस से भी नेताओं का रुख समाजवादी पार्टी की ओर
कांग्रेस अनुसूचित वर्ग के जिला सचिव शिव कैलाश रावत ने अपने दर्जनों समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ही आज के समय में वास्तविक सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों की आवाज उठाने वाली पार्टी है।
अन्य शामिल होने वाले प्रमुख नेता और कार्यकर्ता
समाजवादी पार्टी में शामिल होने वाले अन्य प्रमुख नामों में शामिल हैं। इसमें बाबू रावत, बबलू रावत (बाराबंकी), कल्लू खान, पवन कुमार यादव, राकेश कुमार, प्रताप रावत, ज्ञानेन्द्र कुमार रावत, मुन्ना रावत, जसवंत रावत, राजकुमार रावत, संतोष कुमार रावत, लल्ला रावत, विनय कुमार रावत, अनिल रावत,मोहम्मद जाबिर, ममता देवी, रेखा देवी, सपना रावत, सुशीला देवी रावत, मंगला रावत, रामऔतार रावत, रामचरन गौतम, नितिन गौतम, राम नरेश रावत, सुरेश चन्द्र वर्मा, जयपाल, रामप्रकाश जलालपुर, राम रतन गौतम, श्याम लाल गौतम, प्रवेश, मुरलीधर रावत, मो. जावेद, अल्तमश खान, भूनेश्वर यादव, मधुराम रावत, राकेश गौतम (मलिहाबाद)
समाजवादी पार्टी का संदेश, 2027 के लिए व्यापक जनाधार
प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने स्पष्ट किया कि पार्टी का दरवाज़ा सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों में आस्था रखने वाले सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए खुला है। उन्होंने कहा कि आज जिस तरह से विभिन्न दलों से कार्यकर्ता और नेता समाजवादी पार्टी में आ रहे हैं, वह इस बात का संकेत है कि 2027 में बदलाव की लहर समाजवादी विचारधारा के पक्ष में बह रही है।
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