सोलर कंपनी से इकाई लगाने के नाम पर मांगी गई थी रकम, SIT ने दाखिल की थी 1600 पन्नों की चार्जशीट
लखनऊ : उत्तर प्रदेश में सोलर ऊर्जा से संबंधित कल-पुर्जे बनाने वाली एक प्रतिष्ठित कंपनी से एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत मांगने के आरोपी निकांत जैन को शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण) सत्येंद्र सिंह की अदालत से बड़ी राहत मिली। अदालत ने पुलिस की कस्टडी में देने की अर्जी को खारिज करते हुए उन्हें जमानत दे दी। इस मामले में एसआईटी ने हाल ही में करीब 1600 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। जिसमें निकांत जैन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। चार्जशीट में यह दावा किया गया कि उन्होंने एक सोलर उपकरण निर्माण कंपनी को उत्तर प्रदेश में इकाई लगाने में ‘सरकारी मंजूरी दिलाने’ के नाम पर एक करोड़ रुपये की मांग की थी।
जानें पूरा मामला
सोलर तकनीक आधारित एक बहुराष्ट्रीय कंपनी ने उत्तर प्रदेश में एक उद्योग इकाई स्थापित करने की योजना बनाई थी। आरोप है कि इस योजना को साकार करने के लिए कंपनी को जरूरी मंजूरियां व सहयोग दिलाने के नाम पर निकांत जैन ने कथित तौर पर भारी रकम की मांग की। SIT की जांच के अनुसार, निकांत जैन ने कई बार बैठकें कर कंपनी अधिकारियों को सरकारी तंत्र में अपने प्रभाव का हवाला दिया और जल्दी स्वीकृति के एवज में एक करोड़ रुपये की डील तय की। इस डील से संबंधित ऑडियो, ईमेल और व्हाट्सएप चैट्स को भी चार्जशीट में संलग्न किया गया है।
यह हुआ अदालत में
शुक्रवार को जब पुलिस ने निकांत जैन को कस्टडी में लेने की अर्जी दी, तो न्यायाधीश सत्येंद्र सिंह ने कहा कि “वर्तमान साक्ष्यों को देखते हुए पुलिस हिरासत की आवश्यकता नहीं है।” इसके बाद निकांत जैन को सशर्त जमानत दे दी गई। मगर, आरोपी बिना अनुमति प्रदेश से बाहर नहीं जा सकेगा, पासपोर्ट जमा करना होगा। गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करनी होगी
एसआईटी की प्रतिक्रिया
एसआईटी सूत्रों ने बताया कि चार्जशीट में टेलीफोनिक रिकॉर्डिंग, डिजिटल चैट, और बैंकिंग ट्रेल सहित कई तकनीकी साक्ष्य शामिल किए गए हैं। टीम अब इस मामले में अन्य अधिकारियों और कथित मध्यस्थों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
विपक्ष का सरकार पर हमला
विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीति पर सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा, “सरकार के संरक्षण में भ्रष्टाचार के आरोपी बच रहे हैं और ईमानदार व्यवसायियों का शोषण हो रहा है।”
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