किसानों की दुर्दशा पर जताई चिंता, गन्ना रकबा घटने को बताया बड़ा खतरा
बरेली : यूपी के बरेली जिले में गन्ना किसानों को समय पर भुगतान न मिलने की समस्या को लेकर जिलाधिकारी (डीएम) अविनाश सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में आयोजित गन्ना मूल्य भुगतान की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने नवाबगंज की ओसवाल शुगर मिल और बहेड़ी की केसर शुगर मिल पर नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी कि यदि शेष भुगतान शीघ्र नहीं किया गया, तो कठोरतम कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
किसानों की समस्याओं को समझें, डीएम का मिल प्रतिनिधियों को दो टूक संदेश
डीएम अविनाश सिंह ने स्पष्ट कहा कि किसानों की दैनिक जरूरतों, बीमारी, बच्चों की पढ़ाई, शादी-ब्याह जैसी परिस्थितियों में उन्हें पैसों की जरूरत होती है। अगर, उन्हें समय पर गन्ने का मूल्य नहीं मिलेगा, तो वे गन्ना देना बंद कर देंगे। यही वजह है कि इस बार केसर शुगर मिल को मात्र 30 प्रतिशत गन्ना ही मिल पाया है।
गन्ने का घटता रकबा, किसानों की नाराजगी
डीएम ने कहा कि गन्ना मूल्य भुगतान की अनियमितता के कारण किसान अब गन्ना खेती से विमुख हो रहे हैं और गन्ने का रकबा लगातार घटता जा रहा है। यह चिंता का विषय है क्योंकि इससे न सिर्फ चीनी उद्योग प्रभावित होगा, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति और बदतर हो जाएगी।
मिलों की स्थिति और भुगतान में देरी की सफाई
बैठक में केसर शुगर मिल के प्रतिनिधि ने कहा कि उनकी उत्तराखंड स्थित 28 एकड़ भूमि के विक्रय की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होती है, शेष गन्ना मूल्य का भुगतान कर दिया जाएगा। वहीं, जिला गन्ना अधिकारी ने जानकारी दी कि अब तक कुल 76 प्रतिशत गन्ना मूल्य का भुगतान किया जा चुका है।
अधिकारियों की उपस्थिति और प्रशासन का रुख
बैठक में नगर मजिस्ट्रेट राजीव कुमार शुक्ला, उप जिलाधिकारी सदर, जिला गन्ना अधिकारी और संबंधित चीनी मिलों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कर दिया कि यदि किसानों को भुगतान नहीं हुआ तो प्रशासन कड़े कदम उठाएगा, जिसमें आर्थिक दंड और विधिक कार्रवाई दोनों शामिल हो सकती हैं।
प्रशासन की प्राथमिकता और किसान का सम्मान
जिलाधिकारी ने बैठक के अंत में कहा कि “किसान की मेहनत का मूल्य समय पर मिलना चाहिए। सरकार और प्रशासन किसानों के साथ खड़ा है। यदि चीनी मिलें अपने दायित्वों का पालन नहीं करेंगी, तो प्रशासन चुप नहीं बैठेगा।”
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