आंदोलन, समाजवाद और किसानों की लड़ाई में बृजेंद्र तिवारी ‘मुन्ना भाई साहब’ का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा
ग्वालियर-चंबल की राजनीति में बृजेंद्र तिवारी ‘मुन्ना भाई साहब’ केवल एक नेता नहीं, बल्कि समाजवादी विचारधारा के ऐसे सशक्त स्तंभ थे। जिन्होंने जीवनभर सत्ता, पूंजी और वर्चस्व की राजनीति को चुनौती दी।किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम ने अपने संस्मरण में उन्हें एक ऐसे आंदोलनकारी के रूप में याद किया है, जिनका पूरा जीवन संघर्ष, सादगी और जनसेवा के लिए समर्पित रहा है। डॉ. सुनीलम के अनुसार, छात्र जीवन से शुरू हुआ उनका और मुन्ना भाई साहब का साथ केवल राजनीतिक नहीं बल्कि पारिवारिक रिश्तों में भी बदल गया। आपातकाल के बाद छात्र आंदोलनों, मजदूर संघर्षों और समाजवादी राजनीति के हर महत्वपूर्ण मोड़ पर मुन्ना भाई साहब अग्रिम पंक्ति में दिखाई दिए। उन्होंने जेबी मंगाराम और जेसी मिल के मजदूर आंदोलनों से लेकर किसानों के अधिकारों तक हर लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई।
समाजवादी विष्णुदत्त तिवारी से मिली वैचारिक विरासत
समाजवादी नेता विष्णुदत्त तिवारी के परिवार से मिली वैचारिक विरासत को मुन्ना भाई साहब ने पूरी निष्ठा से आगे बढ़ाया। जॉर्ज फर्नांडिस, मधु लिमये, शरद यादव और रघु ठाकुर जैसे नेताओं के साथ उनका जुड़ाव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि वैचारिक प्रतिबद्धता का प्रतीक था। इसके बाद के वर्षों में वे समता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बने और विधायक भी रहे, लेकिन भाजपा में जाने के बाद भी उनकी समाजवादी सोच कभी नहीं बदली। अंततः उन्होंने सक्रिय सत्ता की राजनीति से दूरी बनाकर किसानों और ग्रामीण समाज के बीच काम करना अधिक उचित समझा। डॉ. सुनीलम ने अपने संस्मरण में यह भी उल्लेख किया कि मुन्ना भाई साहब केवल आंदोलनकारी नेता नहीं थे, बल्कि जरूरतमंदों के लिए हमेशा आगे रहने वाले संवेदनशील इंसान थे।

शिक्षा, समाज सेवा और किसानों के हित में उल्लेखनीय योगदान
शिक्षा, समाज सेवा और किसानों के हित में उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर भी उल्लेखनीय योगदान दिया। गरीब बच्चों के स्कूल के लिए जमीन दान करना हो या छात्रों की शिक्षा में मदद करना, उन्होंने हर जिम्मेदारी को समाज सेवा का माध्यम बनाया। मुन्ना भाई साहब का निधन केवल एक व्यक्ति की विदाई नहीं, बल्कि ग्वालियर-चंबल की समाजवादी राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत है। हालांकि, उनके विचार, संघर्ष और जनसेवा की विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। आज आवश्यकता इस बात की है कि राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम न बनकर समाज परिवर्तन का साधन बने, ठीक वैसे ही, जैसा मुन्ना भाई साहब ने अपने पूरे जीवन में करके दिखाया।
विचारों को आगे बढ़ाया जाए
उनकी स्मृति को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि समाजवादी मूल्यों, किसानों के अधिकारों और जनहित की राजनीति को आगे बढ़ाया जाए। यही उनके जीवन संघर्ष का सबसे बड़ा संदेश और सबसे स्थायी योगदान है।
