जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले की सुनवाई में अदालत की अहम टिप्पणी, 18 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने युवाओं के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यदि कुछ युवा भटककर हिंसक गतिविधियों में शामिल भी हो जाएं, तब भी राज्य का पहला दायित्व उनसे संवाद करना, समझाना और काउंसलिंग के माध्यम से उन्हें सही रास्ते पर लाना होना चाहिए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल पूरे समूह को कुछ लोगों की हरकतों के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। युवाओं की बात सुनना, उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें उचित मार्गदर्शन देना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों को भी संयम बरतने की सलाह दी। अदालत ने कहा कि आक्रामक रवैया सामाजिक तनाव को बढ़ा सकता है। यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कोई अप्रिय घटना होती है, तो पुलिस को धैर्य और संवेदनशीलता के साथ स्थिति संभालनी चाहिए।
अदालत ने कहा कि इस विषय से जुड़ी कई याचिकाएं पहले से लंबित हैं। इसलिए मौजूदा याचिका को उन मामलों के साथ जोड़ दिया गया है। अब इस पूरे प्रकरण की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में प्रदर्शन के कथित आयोजकों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई। साथ ही जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां करने वाले युवाओं को सात दिन की सामुदायिक सेवा की सजा देने और 20 जुलाई के प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई।