लाल गुम्बद निवासी कुन्ने लाल का दावा- 50 साल से इलाके में रह रहा हूं और पिछले चुनावों में करता रहा हूं मतदान; परिवार ने भी जताई आपत्ति
नई दिल्ली: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची को लेकर एक और मामला सामने आया है। लाल गुम्बद निवासी 60 वर्षीय कुन्ने लाल का नाम कथित तौर पर मृतकों की सूची में दर्ज होने की बात सामने आई है। कुन्ने लाल ने वीडियो जारी कर कहा है कि वह पूरी तरह जीवित हैं और पिछले चुनावों में मतदान भी करते रहे हैं। कुन्ने लाल के मुताबिक, वह करीब 50 वर्षों से इसी इलाके में रह रहे हैं। परिवार के अन्य सदस्यों के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में दर्ज हैं, लेकिन उनका नाम सूची में नहीं है।
एनजीओ से परिवार को मिली जानकारी
कुन्ने लाल की नातिन अनीता ने बताया कि उनके दादाजी बिल्कुल ठीक हैं। परिवार में माता-पिता, भाई, उनकी पत्नी और अन्य सदस्यों के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल हैं, लेकिन केवल कुन्ने लाल का नाम गायब है। अनीता के मुताबिक, दो दिन पहले एक एनजीओ में काम करने वाली महिला ने परिवार को बताया कि कुन्ने लाल का नाम मतदाता सूची में नहीं है। इसके बाद परिवार ने सूची की जानकारी जुटाई तो कथित तौर पर उनका नाम मृतकों की सूची में होने की बात सामने आई।
गांव में थे कुन्ने लाल, नहीं भरा गया एन्यूमरेशन फॉर्म
अनीता ने बताया कि जब एन्यूमरेशन फॉर्म भरे जा रहे थे, उस समय कुन्ने लाल गांव में थे। परिवार की ओर से इसकी जानकारी भी दी गई थी। परिवार का दावा है कि संबंधित अधिकारी ने कहा था कि उनका फॉर्म बाद में भरवा लिया जाएगा, लेकिन इसके बाद कोई फॉर्म भरवाने नहीं आया। अब ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होने और मृतकों की सूची में नाम दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद परिवार ने सवाल उठाए हैं।
एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी मामला
एसआईआर के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। ड्राफ्ट सूची से 47.56 लाख नाम बाहर किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर 21 सितंबर को सुनवाई होनी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
47.56 लाख नाम हटाने पर उठे सवाल
अंजलि भारद्वाज और अमृता जोहरी की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने याचिका दाखिल की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नोटिस पाने वाले करीब 33.12 लाख मतदाताओं के नाम और उन्हें नोटिस जारी करने के विशिष्ट कारण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने सभी नोटिस पाने वाले मतदाताओं की खोज योग्य सूची और उन्हें नोटिस जारी करने के कारण सार्वजनिक करने की मांग की है। कुन्ने लाल का मामला सामने आने के बाद एसआईआर की ड्राफ्ट मतदाता सूची में नामों की शुद्धता और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
