उलेमा ने कुरआन और सुन्नत पर अमल, बेटियों की बेहतर तालीम और मुल्क से मोहब्बत की दी नसीहत, प्रशासन के शांतिपूर्ण इंतज़ामों को मिला ‘बरेली मॉडल’ का सम्मान
बरेली : फाज़िल ए बरेलवी इमाम अहमद रज़ा ख़ान (आला हज़रत) के 108वें उर्स-ए-रज़वी का दूसरा दिन अकीदत, रूहानियत और अमन के माहौल में संपन्न हुआ। दरगाह आला हज़रत, इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान और मदरसा जामियातुर्रज़ा में देश-विदेश से आए लाखों जायरीन ने शिरकत की। दिनभर कुरआनख़्वानी, मिलाद, कुल शरीफ़, जुमे की नमाज़ और दीनी महफ़िलों का सिलसिला जारी रहा, जबकि रात में आयोजित तहफ़्फुज़-ए-मज़हब-ओ-मसलक कॉन्फ्रेंस में नामवर उलेमा ने दीन-ए-इस्लाम, इंसानियत, तालीम, भाईचारे और वतनपरस्ती का पैग़ाम दिया। फ़ज्र की नमाज़ के बाद कुरआनख़्वानी से कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। हज़रत जिलानी मियां और रेहान-ए-मिल्लत के कुल शरीफ़ के बाद आला हज़रत की लिखी नात और मनकबत से पूरा माहौल रूहानी हो उठा। रात में दरगाह सरपरस्त हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा ख़ान (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती और सज्जादानशीन मुफ़्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) की सदारत में इस्लामिया मैदान में मुख्य कॉन्फ्रेंस आयोजित हुई। इसमें देश-विदेश से आए उलेमा ने इस्लाम की बुनियादी तालीमात और मसलक-ए-आला हज़रत के मिशन पर विस्तार से रोशनी डाली।
कुरआन और पैग़म्बर-ए-इस्लाम की तालीमात के मुताबिक
कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुफ़्ती सलीम नूरी बरेलवी ने कहा कि मुसलमान अपनी ज़िंदगी कुरआन और पैग़म्बर-ए-इस्लाम की तालीमात के मुताबिक गुज़ारें। उन्होंने हालिया अमेरिका-ईरान संघर्ष को सियासी करार देते हुए कहा कि उसे मज़हबी जंग नहीं कहा जा सकता। उन्होंने नौजवानों से उच्च शिक्षा हासिल करने, नशे से दूर रहने, कानून पर भरोसा रखने और मुल्क की तरक़्क़ी में योगदान देने की अपील की। साथ ही कहा कि मदरसों ने हमेशा अमन, इंसानियत और वतनपरस्ती की तालीम दी है।
बेटियों की बेहतर तालीम पर दें जोर
कार्यक्रम का संचालन करते हुए कारी यूसुफ रज़ा संभली ने मुस्लिम समाज से बेटियों की बेहतर तालीम और तरबियत पर विशेष ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि नई नस्ल को दीनी और अख़लाक़ी तालीम देना वक्त की सबसे बड़ी ज़रूरत है। वहीं कारी अब्दुर्रहमान क़ादरी ने कहा कि मसलक-ए-आला हज़रत का मूल संदेश सुन्नियों में इत्तेहाद, अमन और सही दीन की समझ को आगे बढ़ाना है। महफ़िल में आला हज़रत और मुफ़्ती-ए-आज़म हिन्द की इल्मी, दीनी और रूहानी ख़िदमात को याद किया गया। देर रात 1 बजकर 40 मिनट पर मुफ़्ती-ए-आज़म हिन्द के कुल शरीफ़ की रस्म अदा की गई। इसके बाद सज्जादानशीन मुफ़्ती अहसन मियां ने मुल्क-ओ-मिल्लत की खुशहाली, अमन, तरक़्क़ी और इंसानियत के लिए ख़ुसूसी दुआ कराई। महफ़िल तड़के तक जारी रही।
डीएम- एसएसपी ने पुलिस के साथ किया फ्लैग मार्च

उर्स को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट रही। डीएम अविनाश सिंह और एसएस अनुराग आर्य ने इस्लामिया मैदान, दरगाह मार्ग, बिहारीपुर चौकी और आसपास के क्षेत्रों में फ्लैग मार्च कर सुरक्षा व्यवस्था का जायज़ा लिया। पूरे मेला क्षेत्र में पुलिस, पीएसी, ड्रोन कैमरे, सीसीटीवी और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है।
जिला प्रशासन के अनुसार, उर्स में देश-विदेश से आने वाले लाखों जायरीन के लिए सुरक्षा, यातायात, साफ-सफाई, पेयजल और चिकित्सा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
सीएम ने की तारीफ
प्रशासन और उर्स आयोजकों के बीच बेहतर समन्वय के चलते इस वर्ष लंगरों में पूरी तरह शाकाहारी भोजन की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित आयोजन की सराहना करते हुए इसे “बरेली मॉडल” बताया।
उर्स के दौरान विभिन्न सियासी और सामाजिक संगठनों ने भी दरगाह आला हज़रत पर अकीदत की चादर पेश की।
अखिलेश – अजय राय ने भेजी चादर

उर्स -ए-रज़वी के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से पार्टी प्रतिनिधियों ने चादरपोशी की और उनका मुबारकबाद का पैग़ाम पढ़कर सुनाया गया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी की ओर से भेजी गई चादर भी दरगाह पर पेश की गई। वहीं एआईएमआईएम प्रमुख बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी की ओर से भी प्रतिनिधिमंडल ने दरगाह पहुंचकर चादरपोशी की। सभी प्रतिनिधिमंडलों ने देश में अमन, भाईचारे, खुशहाली और तरक़्क़ी के लिए दुआ की।
जायरीन की सहूलियत के लिए बरेली सिटी स्टेशन से मदरसा जामियातुर्रज़ा तक निशुल्क बस सेवा संचालित की जा रही है। दिनभर आंवला, फरीदपुर, मीरगंज, भोजीपुरा, बहेड़ी, देवचरा और शहर के विभिन्न इलाकों से चादरों के जुलूस दरगाह पहुंचे।
कल 2.38 बजे आला हजरत का कुल

8 अगस्त को फ़ज्र की नमाज़ के बाद कुरआनख़्वानी से अंतिम दिन के कार्यक्रम शुरू होंगे। सुबह 8 बजे से देश-विदेश के उलेमा के बयान और दीनी महफ़िलों का सिलसिला चलेगा तथा दोपहर 2 बजकर 38 मिनट पर कुल शरीफ़ की रस्म के साथ तीन दिवसीय 108वें उर्स-ए-रज़वी का समापन होगा। इस वर्ष का उर्स एक बार फिर अमन, मोहब्बत, इंसानियत, तालीम और गंगा-जमुनी तहज़ीब का मजबूत पैग़ाम देने वाला आयोजन बनकर सामने आया।
